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7/10/2016

सैमसंग के रोचक तथ्य – Amazing Samsung Facts 


 July 10.2016


दोस्तों, आज सैमसंग (Samsung) कंपनी दुनिया की सबसे बड़ी स्मार्टफोन मेकिंग कंपनी है। इसी के साथ, कई और बिजनेस भी कंपनी ने संभाले हैं। आज हम आपको बताने जा रहे हैं सैमसंग कंपनी के बारे में कुछ फैक्ट्स।


सैमसंग के रोचक तथ्य – Amazing Samsung Facts :
Samsung Fact 1 : सैमसंग कंपनी ली बायुंग चल ली ने 1938 में 40 लोगों के साथ साउथ कोरिया में शुरू की थी। इसका सबसे अहम काम था ड्राय फिश एक्सपोर्ट करना।

Samsung Fact 2 : सैमसंग कंपनी महज 40 लोगो के साथ स्टाफ के साथ शुरू हुई थी लेकिन अब इसमें 3,75,000 लोग काम करते है। वही एप्पल के पास केवल 80,300 कर्मचारी हैं।

Samsung Fact 3 : Samsung company 1938 से लेकर अब तक 80 अलग-अलग तरह के बिजनेस में अपना हाथ आजमा चुकी है।

Samsung Fact 4 : सैमसंग ने इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री की शुरूआत 1960 में की थी। और आपको बता दें कि सैमसंग के 90 प्रतिशत प्रोडक्ट्स खुद सैमसंग की ही फैक्ट्री में बनते हैं।

Samsung Fact 5 : सैमसंग ग्रुप करीब 80 अलग-अलग बिजनेस कर चुका है। 1960 में सैमसंग ग्रुप ने इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री शुरू की। आपको बता दें कि सैमसंग के 90 प्रतिशत प्रोडक्ट्स खुद सैमसंग की ही फैक्ट्री में बनते हैं।

Samsung Fact 6 : धीरे-धीरे कंपनी ने कई इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम्स लॉन्च किए। टीवी, रेफ्रिजरेटर के साथ ही मोबाइल फोन और किचन में उपयोग होने वाले गैजेट्स भी लेकर आई। सैमसंग कंपनी को सफल बनाने के पीछे इसके फाउंडर बायुंग चुल ली (Byung-Chull Lee) का बहुत बड़ा हाथ है।

Samsung Fact 7 : ये कंपनी कोरियन शब्द (सैमसंग) नाम से शुरू की थी। अंग्रेजी भाषा में इसका मतलब थ्री स्टार्स होता है।

Samsung Fact 8 : बुर्ज खलीफा दुनिया की सबसे ऊंची बिल्डिंग है। दुबई में स्थित इस टावर का काम भी सैमसंग कन्सट्रक्शन डिविजन ने संभाला है। बुर्ज खलीफा का काम कई कन्सट्रक्शन कंपनियां संभालती हैं जिनमें से अहम सैमसंग है।

Samsung Fact 9 : दुनिया का पहला 3 डी होम थियेटर 2010 में कंपनी द्वारा शुरू किया गया था।

Samsung Fact 10 : सैमसंग गैलेक्सी S6 और S6 एज अब लॉन्च हो चुके हैं। ये दोनों फोन बार्सिलोना स्पेन में हुए एक इवेंट में लॉन्च किए गए हैं।

Samsung Fact 11 : 2010 में, सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स पहला बड़ा मंच आधारित स्मार्टफोन लांच किया है।

Samsung Fact 12 : सैमसंग द्वारा सबसे पहला मोबाइल डिवाइज 1986 में लॉन्च किया गया था। यह एक कार फोन था। यह गैजेट बुरी तरह से पिट गया था।

Samsung Fact 13 : 1993 से सैमसंग कंपनी दुनिया की सबसे बड़ी चिप (मेमोरी चिप या रैम) मेकिंग कंपनियों में से एक है। खबरों की मानें तो एप्पल आईफोन 7 के लिए चिप भी सैमसंग कंपनी ने बनाई है।

Samsung Fact 14 : तरक्की की सीढ़ी चढ़ना सैमसंग ने 1995 से ही शुरू कर दिया था। इसी साल कंपनी के चेयरमैन ‘ली कुन ही’ (Lee Kun-hee) ने सैमसंग के कर्मचारियों के सामने 1,50,000 फोन और फैक्स मशीन इकट्ठा किए और अपने कर्मचारियों के सामने उन्हें नष्ट करवाया था। सैमसंग के 2000 कर्मचारियों ने यह नजारा देखा था।

Samsung Fact 15 : सैमसंग कंपनी ने सबसे पहले CDMA (1996 में), डिजिटल टीवी (1998 में), वॉट फोन (1999 में) और MP3 फोन (1999 में) लॉन्च किया था।

Samsung Fact 16 : सैमसंग ने इलेक्ट्रॉनिक्स मार्केट के पॉपुलर ब्रांड सोनी को 2004-2005 में ओवरटेक किया और पूरी दुनिया में छा गई।

Samsung Fact 17 : आज के समय में दुनिया में बिकने वाला हर तीसरा फोन सैमसंग का होता हैं।

Samsung Fact 18 : दुनिया के 70 प्रतिशत स्मार्टफोन सैमसंग के द्वारा बनाई गई RAM का इस्तेमाल करते हैं।

Samsung Fact 19 : सैमसंग साउथ कोरिया में सबसे ज्यादा रेवेन्यू जनरेट करने वाली कंपनी है।

Samsung Fact 20 : हर मिनट दुनिया भर में 100 सैमसंग टीवी बेचे जाते हैं।

Samsung Fact 21 : सैमसंग ग्रुप हर साल अपने नॉन प्रॉफिटेबल ऑर्गनाइजेशन सैमसंग मेडिकल सेंटर के लिए 100 मिलियन डॉलर डोनेट करता है।

Samsung Fact 22 : Apple iPad’s retina डिस्प्ले वास्तव में सैमसंग द्वारा बनाई गई है।

Samsung Fact 23 : आपको शायद मजाक लगे लेकिन सच ये है कि सैमसंग कभी सब्जी, नूडल्स और मछली भी बेचा करती थी।

7/06/2016

हॉन्टेड विलेज “कुलधरा” – एक श्राप के कारण 170 सालों से हैं वीरान – रात को रहता है भूत प्रेतों का डेरा

July 05.2016

Kuldhara History & Story In Hindi : हमारे देश भारत के कई शहर अपने दामन में कई रहस्यमयी घटनाओ को समेटे हुए है ऐसी ही एक घटना हैं राजस्थान के जैसलमेर जिले के कुलधरा(Kuldhara) गाँव कि, यह गांव पिछले 170 सालों से वीरान पड़ा हैं। कुलधरा(Kuldhara) गाँव के हज़ारों लोग एक ही रात मे इस गांव को खाली कर के चले गए थे और जाते जाते श्राप दे गए थे कि यहाँ फिर कभी कोई नहीं बस पायेगा। तब से गाँव वीरान पड़ा हैं।

कहा जाता है कि यह गांव रूहानी ताकतों के कब्जे में हैं, कभी एक हंसता खेलता यह गांव आज एक खंडहर में तब्दील हो चुका है| टूरिस्ट प्लेस में बदल चुके कुलधरा गांव घूमने आने वालों के मुताबिक यहां रहने वाले पालीवाल ब्राह्मणों की आहट आज भी सुनाई देती है। उन्हें वहां हरपल ऐसा अनुभव होता है कि कोई आसपास चल रहा है। बाजार के चहल-पहल की आवाजें आती हैं, महिलाओं के बात करने उनकी चूडिय़ों और पायलों की आवाज हमेशा ही वहां के माहौल को भयावह बनाते हैं। प्रशासन ने इस गांव की सरहद पर एक फाटक बनवा दिया है जिसके पार दिन में तो सैलानी घूमने आते रहते हैं लेकिन रात में इस फाटक को पार करने की कोई हिम्मत नहीं करता हैं।



वैज्ञानिक तरीके से हुआ था गाँव का निर्माण
कुलधरा(Kuldhara) जैसलमेर से लगभग अठारह किलोमीटर की दूरी पर स्थिति है । पालीवाल समुदाय के इस इलाक़े में चौरासी गांव थे और यह उनमें से एक था । मेहनती और रईस पालीवाल की कुलधार शाखा ने सन 1291 में तकरीबन छह सौ घरों वाले इस गांव को बसाया था। कुलधरा गाँव पूर्ण रूप से वैज्ञानिक तौर पर बना था। ईट पत्थर से बने इस गांव की बनावट ऐसी थी कि यहां कभी गर्मी का अहसास नहीं होता था। कहते हैं कि इस कोण में घर बनाए गये थे कि हवाएं सीधे घर के भीतर होकर गुज़रती थीं । कुलधरा के ये घर रेगिस्ताकन में भी वातानुकूलन का अहसास देते थे । इस जगह गर्मियों में तापमान 45 डिग्री रहता हैं पर आप यदि अब भी भरी गर्मी में इन वीरान पडे मकानो में जायेंगे तो आपको शीतलता का अनुभव होगा। गांव के तमाम घर झरोखों के ज़रिए आपस में जुड़े थे इसलिए एक सिरे वाले घर से दूसरे सिरे तक अपनी बात आसानी से पहुंचाई जा सकती थी । घरों के भीतर पानी के कुंड, ताक और सीढि़यां कमाल के हैं ।

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पालीवाल ब्राम्हण होते हुए भी बहुत ही उद्यमी समुदाय था । अपनी बुद्धिमत्ताl, अपने कौशल और अटूट परिश्रम के रहते पालीवालों ने धरती पर सोना उगाया था । हैरत की बात ये है कि पाली से कुलधरा आने के बाद पालीवालों ने रेगिस्तापनी सरज़मीं के बीचोंबीच इस गांव को बसाते हुए खेती पर केंद्रित समाज की परिकल्पलना की थी । रेगिस्ता़न में खेती । पालीवालों के समृद्धि का रहस्य था । जिप्सरम की परत वाली ज़मीन को पहचानना और वहां पर बस जाना । पालीवाल अपनी वैज्ञानिक सोच, प्रयोगों और आधुनिकता की वजह से उस समय में भी इतनी तरक्की कर पाए थे ।

पालीवाल समुदाय आमतौर पर खेती और मवेशी पालने पर निर्भर रहता था । और बड़ी शान से जीता था । जिप्सआम की परत बारिश के पानी को ज़मीन में अवशोषित होने से रोकती और इसी पानी से पालीवाल खेती करते । और ऐसी वैसी नहीं बल्कि जबर्दस्तं फसल पैदा करते । पालीवालों के जल-प्रबंधन की इसी तकनीक ने थार रेगिस्तारन को इंसानों और मवेशियों की आबादी या तादाद के हिसाब से दुनिया का सबसे सघन रेगिस्ताकन बनाया । पालीवालों ने ऐसी तकनीक विकसित की थी कि बारिश का पानी रेत में गुम नहीं होता था बल्कि एक खास गहराई पर जमा हो जाता था ।


कुलधरा के वीरान होने कि कहानी (Story of Kuldhara)
जो गाँव इतना विकसित था तो फिर क्या वजह रही कि वो गाँव रातों रात वीरान हो गया। इसकी वजह था गाँव का अय्याश दीवान सालम सिंह जिसकी गन्दी नज़र गाँव कि एक खूबसूरत लड़की पर पड़ गयी थी। दीवान उस लड़की के पीछे इस कदर पागल था कि बस किसी तरह से उसे पा लेना चाहता था। उसने इसके लिए ब्राह्मणों पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। हद तो तब हो गई कि जब सत्ता के मद में चूर उस दीवान ने लड़की के घर संदेश भिजवाया कि यदि अगले पूर्णमासी तक उसे लड़की नहीं मिली तो वह गांव पर हमला करके लड़की को उठा ले जाएगा। गांववालों के लिए यह मुश्किल की घड़ी थी। उन्हें या तो गांव बचाना था या फिर अपनी बेटी। इस विषय पर निर्णय लेने के लिए सभी 84 गांव वाले एक मंदिर पर इकट्ठा हो गए और पंचायतों ने फैसला किया कि कुछ भी हो जाए अपनी लड़की उस दीवान को नहीं देंगे।

फिर क्या था, गांव वालों ने गांव खाली करने का निर्णय कर लिया और रातोंरात सभी 84 गांव आंखों से ओझल हो गए। जाते-जाते उन्होंने श्राप दिया कि आज के बाद इन घरों में कोई नहीं बस पाएगा। आज भी वहां की हालत वैसी ही है जैसी उस रात थी जब लोग इसे छोड़ कर गए थे।


आज भी है श्राप का असर:
पालीवाल ब्राह्मणों के श्राप का असर यहां आज भी देखा जा सकता है। जैसलमेर के स्थानीय निवासियों की मानें तो कुछ परिवारों ने इस जगह पर बसने की कोशिश की थी, लेकिन वह सफल नहीं हो सके। स्थानिय लोगों का तो यहां तक कहना है कि कुछ परिवार ऐसे भी हैं, जो वहां गए जरूर लेकिन लौटकर नहीं आए। उनका क्या हुआ, वे कहां गए कोई नहीं जानता।


यहां के धरती में दबा है सोना इसलिए आते हैं पर्यटक:
पर्यटक यहां इस चाह में आते हैं कि उन्हें यहां दबा हुआ सोना मिल जाए। इतिहासकारों के मुताबिक पालीवाल ब्राह्मणों ने अपनी संपत्ति जिसमें भारी मात्रा में सोना-चांदी और हीरे-जवाहरात थे, उसे जमीन के अंदर दबा रखा था। यही वजह है कि जो कोई भी यहां आता है वह जगह-जगह खुदाई करने लग जाता है। इस उम्मीद से कि शायद वह सोना उनके हाथ लग जाए। यह गांव आज भी जगह-जगह से खुदा हुआ मिलता है।


पेरानार्मल सोसायटी की टीम ने कि कुलधरा में पड़ताल :-
मई 2013 मे दिल्ली से आई भूत प्रेत व आत्माओं पर रिसर्च करने वाली पेरानार्मल सोसायटी की टीम ने कुलधरा(Kuldhara) गांव में बिताई रात। टीम ने माना कि यहां कुछ न कुछ असामान्य जरूर है। टीम के एक सदस्य ने बताया कि विजिट के दौरान रात में कई बार मैंने महसूस किया कि किसी ने मेरे कंधे पर हाथ रखा, जब मुड़कर देखा तो वहां कोई नहीं था। पेरानॉर्मल सोसायटी के उपाध्यक्ष अंशुल शर्मा ने बताया था कि हमारे पास एक डिवाइस है जिसका नाम गोस्ट बॉक्स है। इसके माध्यम से हम ऐसी जगहों पर रहने वाली आत्माओं से सवाल पूछते हैं। कुलधरा में भी ऐसा ही किया जहां कुछ आवाजें आई तो कहीं असामान्य रूप से आत्माओं ने अपने नाम भी बताए। शनिवार चार मई की रात्रि में जो टीम कुलधरा गई थी उनकी गाडिय़ों पर बच्चों के हाथ के निशान मिले। टीम के सदस्य जब कुलधरा गांव में घूमकर वापस लौटे तो उनकी गाडिय़ों के कांच पर बच्चों के पंजे के निशान दिखाई दिए। (जैसा कि कुलधरा(Kuldhara) गई टीम के सदस्यों ने मीडिया को बताया )

6/27/2016

मानवीय इतिहास के 10 सबसे अमीर लोग (Richest People Of Human History)


Story of Top 10 richest people of human history in Hindi : टाइम मैगजीन ने इतिहास के सबसे अमीर लोगो की लिस्ट जारी की है। इस लिस्ट में दिल्ली की सत्ता पर राज करने वाले मुगल सम्राट अकबर भारत के सबसे अमीर आदमी हैं। माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक बिल गेट्स को भी इस लिस्ट में शामिल किया गया है। टाइम मैगजीन की इस लिस्ट में टिम्बकटू के राजा मनसा मूसा टॉप पर हैं। टाइम मैग्जीन ने पहली बार मानव इतिहास की दस सबसे अमीर लोगों की लिस्ट जारी की है।

1. मनसा मूसा, माली (Mansa Musa)– टाइम मैगजीन ने टिम्बकटू के राजा मनसा मूसा को अब तक का सबसे अमीर व्यक्ति माना है। सूची में 1280 से 1337 तक टिम्बकटू के राजा रहे मनसा मूसा कि संपत्ति सबसे ज्यादा बताई गई है।


2. अगस्तस केसर, रोम (Augustus Caser) – टाइम मैगजीन की इस लिस्ट में दूसरे नंबर पर रोम के राजा अगस्तस केसर हैं। 63 बीसी से 11 एडी तक राजा रहे अगस्तस की संपत्ति 46 खरब डॉलर यानि 2921 खरब रुपए बताई गई है।
3. सम्राट शेनजोंग, चीन (Emperor Shenzong) – टाइम मैगजीन के अनुसार दुनिया के सबसे शक्तिशाली साम्राज्य में से एक सोंग राजवंश के सम्राट शेनजोंग की संपत्ति तीसरे नंबर पर थी। साल 1048 से 1085 तक राज करने वाले शेनजोंग की संपत्ति दुनिया की जीडीपी के 25 प्रतिशत के बराबर थी।
4. अकबर, भारत (Akbar) – टाइम मैगजीन की अमीरों की सूची में मुगल सम्राट अकबर चौथे नंबर पर हैं। अकबर की संपत्ति दुनिया की जीडीपी का 25 प्रतिशत के बराबर थी।
5. जोसेफ स्टालिन, सोवियत संघ (Joseph Stalin) – अमीरों की इस लिस्ट में सोवियत संघ के के राजा जोसेफ स्टालिन को पांचवें नंबर पर रखा गया है। 1950 में सोवियत संघ में राज करने वाले जोसेफ की संपत्ति दुनिया की जीडीपी की 9.6 प्रतिशत थी। 1950 में सोवियत संघ की हिस्सेदारी दुनिया की जीडीपी का 9.5 प्रतिशत थी।
6. एंड्रयू कार्नेगी, अमेरिका ( Andrew Carnegie) – टाइम मैगजीन ने अमेरिका के एंड्रयू कार्नेगी को इस लिस्ट में छठे नंबर पर रखा है। उन्होंने अपनी कंपनी यूएस स्टील को 1901 में 48 करोड़ डॉलर में बेची थी। ये अमेरिका की जीडीपी की 2.1 फीसदी से अधिक थी। अगर वर्तमान में उनकी संपत्ति आंकी जाए तो वह 372 अरब डॉलर होती है।
7. जॉन डी रॉकफेलर, अमेरिका (John D Rockefeller) – 1918 में जॉन डी रॉकफेलर द्वारा भरे गए इनकम टैक्स के अनुसार उनकी संपत्ति करीब 1.5 अरब डॉलर थी। उन्होंने 1863 में पेट्रोलियम इंडस्ट्री में निवेश करना शुरू किया था। अगर वर्तमान में उनकी संपत्ति आंकी जाए तो वह 341 अरब डॉलर होती है।
8. एलन रूफुस, इंग्लैंड (Alan Rufus) – इस लिस्ट में टाइम मैगजीन ने एलन रूफुस को आठवें स्थान पर रखा है। उनकी मौत के समय उनकी संपत्ति 11 हजार पाउंड थी। अगर वर्तमान में उनकी संपत्ति आंकी जाई तो वह 194 अरब डॉलर होती है।
9. बिल गेट्स अमेरिका, (Bill Gates, America) – माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक बिल गेट्स को टाइम मैगजीन की इस लिस्ट में नौंवे नंबर पर रखा गया है। फोर्ब्स मैगजीन के अनुमान इस साल गेट्स कुल संपत्ति 78.9 अरब डॉलर होगी।
10. चंगेज खान मंगोलिया, Changez khan, Mongolia) – चीन से यूरोप तक सन् 1162 से 1227 तक राज करने वाले चंगेज खान को टाइम मैगजीन ने इस सूची में दसवें नंबर पर रखा है। उन्होंने इतिहास में सबसे बड़े साम्राज्य को संभाला था।

6/24/2016

मेवाड़ राजवंश का संक्षिप्त इतिहास

मेवाड़ राजवंश का संक्षिप्त इतिहास

Posted on Jun 24, 2016


वीर प्रसूता मेवाड की धरती राजपूती प्रतिष्ठा, मर्यादा एवं गौरव का प्रतीक तथा सम्बल है। राजस्थान के दक्षिणी पूर्वी अंचल का यह राज्य अधिकांशतः अरावली की अभेद्य पर्वत श्रृंखला से परिवेष्टिता है। उपत्यकाओं के परकोटे सामरिक दृष्टिकोण के अत्यन्त उपयोगी एवं महत्वपूर्ण है। >मेवाड अपनी समृद्धि, परम्परा, अधभूत शौर्य एवं अनूठी कलात्मक अनुदानों के कारण संसार के परिदृश्य में देदीप्यमान है। स्वाधिनता एवं भारतीय संस्कृति की अभिरक्षा के लिए इस वंश ने जो अनुपम त्याग और अपूर्व बलिदान दिये सदा स्मरण किये जाते रहेंगे। मेवाड की वीर प्रसूता धरती में रावल बप्पा, महाराणा सांगा, महाराण प्रताप जैसे सूरवीर, यशस्वी, कर्मठ, राष्ट्रभक्त व स्वतंत्रता प्रेमी विभूतियों ने जन्म लेकर न केवल मेवाड वरन संपूर्ण भारत को गौरान्वित किया है। स्वतन्त्रता की अखल जगाने वाले प्रताप आज भी जन-जन के हृदय में बसे हुये, सभी स्वाभिमानियों के प्रेरक बने हुए है। मेवाड का गुहिल वंश संसार के प्राचीनतम राज वंशों में माना जाता है। मान्यता है कि सिसोदिया क्षत्रिय भगवान राम के कनिष्ठ पुत्र लव के वंशज हैं




 मेवाड में गहलोत राजवंश – बप्पा ने सन 734 ई० में चित्रांगद गोरी परमार से चित्तौड की सत्ता छीन कर मेवाड में गहलौत वंश के शासक का

सूत्रधार बनने का गौरव प्राप्त किया। इनका काल सन 734 ई० से 753 ई० तक था। इसके बाद के शासकों के नाम और समय काल निम्न था –
रावल बप्पा ( काल भोज ) – 734 ई० मेवाड राज्य के गहलौत शासन के सूत्रधार।
रावल खुमान – 753 ई०
मत्तट – 773 – 793 ई०
भर्तभट्त – 793 – 813 ई०
रावल सिंह – 813 – 828 ई०
खुमाण सिंह – 828 – 853 ई०
महायक – 853 – 878 ई०
खुमाण तृतीय – 878 – 903 ई०
भर्तभट्ट द्वितीय – 903 – 951 ई०
अल्लट – 951 – 971 ई०
नरवाहन – 971 – 973 ई०
शालिवाहन – 973 – 977 ई०
शक्ति कुमार – 977 – 993 ई०
अम्बा प्रसाद – 993 – 1007 ई०
शुची वरमा – 1007- 1021 ई०
नर वर्मा – 1021 – 1035 ई०
कीर्ति वर्मा – 1035 – 1051 ई०
योगराज – 1051 – 1068 ई०
वैरठ – 1068 – 1088 ई०
हंस पाल – 1088 – 1103 ई०
वैरी सिंह – 1103 – 1107 ई०
विजय सिंह – 1107 – 1127 ई०
अरि सिंह – 1127 – 1138 ई०
चौड सिंह – 1138 – 1148 ई०
विक्रम सिंह – 1148 – 1158 ई०
रण सिंह ( कर्ण सिंह ) – 1158 – 1168 ई०
क्षेम सिंह – 1168 – 1172 ई०
सामंत सिंह – 1172 – 1179 ई०
(क्षेम सिंह के दो पुत्र सामंत और कुमार सिंह। ज्येष्ठ पुत्र सामंत मेवाड की गद्दी पर सात वर्ष रहे क्योंकि जालौर के कीतू चौहान मेवाड पर अधिकार कर लिया। सामंत सिंह अहाड की पहाडियों पर चले गये। इन्होने बडौदे पर आक्रमण कर वहां का राज्य हस्तगत कर लिया। लेकिन इसी समय इनके भाई कुमार सिंह पुनः मेवाड पर अधिकार कर लिया। )

कुमार सिंह – 1179 – 1191 ई०
मंथन सिंह – 1191 – 1211 ई०
पद्म सिंह – 1211 – 1213 ई०
जैत्र सिंह – 1213 – 1261 ई०
तेज सिंह -1261 – 1273 ई०
समर सिंह – 1273 – 1301 ई०
(समर सिंह का एक पुत्र रतन सिंह मेवाड राज्य का उत्तराधिकारी हुआ और दूसरा पुत्र कुम्भकरण नेपाल चला गया। नेपाल के राज वंश के शासक कुम्भकरण के ही वंशज हैं। )

35. रतन सिंह ( 1301-1303 ई० ) – इनके कार्यकाल में अलाउद्दीन खिलजी ने चित्तौडगढ पर अधिकार कर लिया। प्रथम जौहर पदमिनी रानी ने सैकडों महिलाओं के साथ किया। गोरा – बादल का प्रतिरोध और युद्ध भी प्रसिद्ध रहा।
36. अजय सिंह ( 1303 – 1326 ई० ) – हमीर राज्य के उत्तराधिकारी थे किन्तु अवयस्क थे। इसलिए अजय सिंह गद्दी पर बैठे।
37. महाराणा हमीर सिंह ( 1326 – 1364 ई० ) – हमीर ने अपनी शौर्य, पराक्रम एवं कूटनीति से मेवाड राज्य को तुगलक से छीन कर उसकी खोई प्रतिष्ठा पुनः स्थापित की और अपना नाम अमर किया महाराणा की उपाधि धारण की । इसी समय से ही मेवाड नरेश महाराणा उपाधि धारण करते आ रहे हैं।
38. महाराणा क्षेत्र सिंह ( 1364 – 1382 ई० )
39. महाराणा लाखासिंह ( 1382 – 11421 ई० ) – योग्य शासक तथा राज्य के विस्तार करने में अहम योगदान। इनके पक्ष में ज्येष्ठ पुत्र चुडा ने विवाह न करने की भीष्म प्रतिज्ञा की और पिता से हुई संतान मोकल को राज्य का उत्तराधिकारी मानकर जीवन भर उसकी रक्षा की।
40. महाराणा मोकल ( 1421 – 1433 ई० )
41. महाराणा कुम्भा ( 1433 – 1469 ई० ) – इन्होने न केवल अपने राज्य का विस्तार किया बल्कि योग्य प्रशासक, सहिष्णु, किलों और मन्दिरों के निर्माण के रुप में ही जाने जाते हैं। कुम्भलगढ़ इन्ही की देन है. इनके पुत्र उदा ने इनकी हत्या करके मेवाड के गद्दी पर अधिकार जमा ल

6/17/2016

Biography & Mark Zuckerberg {in Hindi} की फेसबुक बनाने की Complete Story

Biography & Mark Zuckerberg {in Hindi} की फेसबुक बनाने की Complete Story


दुनिया में यूँ तो रोजाना हजारों लोग जन्म लेते हैं लेकिन कुछ लोग दुनिया बदलने के लिए ही पैदा होते हैं। मार्क जुकरबर्ग(Mark Zuckerberg) भी एक ऐसा ही नाम है जिसने अपने जीवन में ऐसी ऊंचाइयों को छुआ जहाँ पहुँचना एक सामान्य व्यक्ति के लिए सपने जैसा है। आज फेसबुक के मालिक मार्क जुकरबर्ग(Mark Zuckerberg) युवाओं के लिए एक प्रेरणा हैं लोग उनके जैसा बनना चाहते हैं और जितनी खुशियां मार्क जुकरबर्ग(Mark Zuckerberg) ने इस दुनियां को दी हैं वो शायद ही किसी ने दी हों।

Mark Zuckerberg Biography in Hindi




May 14th, 1984 को मार्क जुकरबर्ग(Mark Zuckerberg) का जन्म हुआ। 2016 में उनके पास $48.2 billion की संपत्ति है और ये बात तो जगजाहिर है कि मार्क दुनिया के सबसे युवा बिलिनेयर में से एक हैं। मार्क की कहानी बहुत ही interesting है, आज हम जानेंगे कि कैसे एक युवा लड़के ने एक वेबसाइट बनायीं? और कैसे वो बना दुनिया की सबसे बड़ी वेबसाइट का मालिक?

Mark Zuckerberg Life History in Hindi

जुकरबर्ग(Mark Zuckerberg) को बचपन से ही कंप्यूटर और इंटरनेट का बहुत शौक था। छोटी सी उम्र से ही वो कम्प्यूटर के प्रोग्राम लिखने लगे थे। उनके पिता उनको प्रोग्रामिंग करने में बहुत मदद करते थे लेकिन मार्क बहुत तेज दिमाग के थे। इसीलिए पिता को मार्क में लिए एक कम्प्यूटर टीचर बुलाना पड़ा जो मार्क को रोजाना कम्प्यूटर प्रोग्रामिंग सिखाया करता था। मार्क की तेज बुद्धि का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि छोटी से उम्र में ही मार्क अपने कंप्यूटर टीचर को भी फेल कर दिया करते थे। उनके अनुभवी टीचर उनकी बातों का जवाब नहीं दे पाते थे।

हाई स्कूल में मार्क ने मैथ्स और फिजिक्स में कई अवार्ड भी जीते। हाई स्कूल की पढाई के दौरान ही मार्क ने एक कंप्यूटर प्रोग्राम बनाया – “Zucknet”, ये एक ऐसा सॉफ्टवेयर था जिससे मार्क घर बैठे हुए ही दुकान पर बैठे पिता से बात कर लेते थे। यही नहीं जिस उम्र में लोग कम्प्यूटर गेम चलाना सीखते हैं, मार्क उस उम्र में कम्प्यूटर गेम्स बनाते थे।

जब हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में एडमिशन लिया तो वहां भी मार्क एक टॉपर छात्र थे और लोगों के बीच “Programming Expert” के नाम से मशहूर थे। यहीं पर उन्होंने “CourseMatch” नाम का एक सॉफ्टवेयर बनाया जो लोगों को अपनी रूचि के अनुसार सही कोर्स select करने में मदद करता था।

History of Facebook in Hindi

कॉलेज के दिनों में “Facebooks” नाम की एक बुक हुआ करती थी जिसमें कॉलेज के सभी स्टूडेंट्स के फोटो और नाम लगे हुए थे। ऐसे ही कुछ सोचकर मार्क जुकरबर्ग ने एक “Facemash” नाम की वेबसाइट बनाई। खास बात ये थी कि इस वेबसाइट में कॉलेज की लड़कियों के फोटो आते थे और उनकी तुलना की जाती थी कि कौन ज्यादा हॉट है। ये वेबसाइट कॉलेज के स्टूडेंट्स में बहुत फेमस हुई लेकिन कॉलेज वालों ने और कुछ लड़कियों ने इसे आपत्तिजनक बताया और इसका विरोध किया। सबसे मजेदार बात इस वेबसाइट में ये थी इस वेबसाइट के लिए लड़कियों की फोटो इकठ्ठा करने के लिए मार्क ने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की वेबसाइट हैक की थी जो उस समय की सबसे strong वेबसाइट मानी जाती थी। इसके लिए हार्वर्ड वालों ने मार्क को बहुत डांटा भी क्यूंकि ये वेबसाइट इतनी ज्यादा पॉपुलर हो गई थी कि हार्वर्ड का सर्वर डाउन हो जाता था।

2004 में मार्क ने एक वेबसाइट बनायीं TheFacebook, जो www.thefacebook.com इस डोमेन पर चलती थी। ये वेबसाइट अभी तक केवल हार्वर्ड में ही फेमस थी लेकिन धीरे धीरे ये वेबसाइट दूसरे कॉलेज में भी पसंद की जाने लगी। मार्क और उसके अन्य कुछ दोस्त(Eduardo Saverin, Andrew McCollum, Chris Hughes and Dustin Moskovitz) इन लोगों ने मिलकर इस वेबसाइट का प्रचार पूरे US के कॉलेजों में करना शुरू किया। ये वेबसाइट बहुत ज्यादा तेजी से पॉपुलर हो रही थी।



कुछ समय तक ये वेबसाइट केवल कॉलेज के स्टूडेंट्स के लिए ही थी लेकिन बाद में दुनिया भर में पॉपुलर होने लगी तो मार्क ने अपनी पढाई को बीच में ही छोड़ देने का फैसला लिया। और इस तरह मार्क ने कॉलेज छोडकर अपनी टीम के साथ पूरी मेहनत के साथ इस वेबसाइट पर काम करना शुरू कर दिया। 2005 में ये “TheFacebook” नाम की वेबसाइट बन गयी “Facebook”। साल 2007 तक फेसबुक पर लाखों बिजनिस पेज और लाखों प्रोफाइल बन चुके थे। अब वो समय आ गया था जब फेसबुक पूरी दुनिया पर राज करने वाली थी। 2011 तक ये वेबसाइट दुनिया की सबसे बड़ी वेबसाइट बन चुकी थी, और मार्क जुकरबर्ग बन चुके थे इंटरनेट की दुनिया के बादशाह।


Mark Zuckerberg
2010 में Time magazine ने मार्क जुकरबर्ग को दुनियां के टॉप 100 अमीर और प्रभावशाली लोगों में शामिल किया और 2016 में उनके प

6/15/2016

कैसे बना एक तांगेवाला अरबपति 

कैसे बना एक तांगेवाला अरबपति How MDH Become Millionaire
                                                                             

 महाशय धरमपाल हट्टी(M.D.H), आज ये नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है| “मसाला किंग”(M.D.H) के नाम से मशहूर महाशय जी आज सफलता की बुलंदियों पर हैं, लेकिन इस सफलता के पीछे एक बहुत सघर्ष भरी कहानी है|

इनका जन्म सियालकोट(जो अब पाकिस्तान में है) में हुआ था| ये एक सामान्य परिवार से ताल्लुक रखते थे, परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी न थी| महाशय जी जब धीरे धीरे बड़े हुए तो स्कूल में दाखिला कराया ये बचपन से ही पढ़ाई में बहुत कमजोर थे पढ़ने लिखने में बिल्कुल मन नहीं लगता था| इनके पिता इनको बहुत समझाते लेकिन महाशय जी बिल्कुल भी पढ़ाई पर ध्यान नहीं देते थे, इसी वजह से पाँचवी कक्षा में वो फेल हो गये और इसी के साथ उन्होनें स्कूल जाना भी छोड़ दिया| पिता ने इनको इसके बाद एक बढ़ई की दुकान पर काम सीखने के लिए भेज दिया| कुछ दिन बाद इनका मन बढ़ई के काम में नहीं लगा तो छोड़ दिया| धीरे धीरे समय आगे बढ़ता गया, इसी बीच महाशय जी 15 साल की उम्र तक करीब 50 काम बदल चुके थे| उन दिनों सियालकोट लाल मिर्च के लिए बहुत प्रसिद्ध था, यही सोचकर महाशय जी के पिताजी ने एक छोटी सी मसाले की दुकान करा दी धीरे धीरे व्यापार अच्छा बढ़ने लगा| लेकिन उन दिनों आज़ादी का आंदोलन अपने चरम पे था| 1947, में जब देश आज़ाद हुआ तो सियालकोट पाकिस्तान का हिस्सा बन चुका था और वहाँ रह रहे हिंदू असुरक्षा महसूस कर रहे थे और दंगे भी काफ़ी भड़क चुके थे इसी डर से उन्हें सियालकोट छोड़ना पड़ा| महाशय जी के अनुसार उन दिनों स्थिति बहुत भयावह थी, चारों तरफ मारामारी मची हुई थी| इन्हें भी अपना घर बार छोड़ कर भागना पढ़ा| बड़ी ही दिक्कत और मुश्किलों से वो नानक डेरा(भारत) पहुचे पर अभी वो शरणार्थी थे अपना सब कुछ लूट चुका था| इसके बाद स्पारिवार कई मीलों चलकर ये अमृतसर पहुचे| दिल्ली में इनके एक रिश्तेदार रहते थे, यही सोच कर महाशय जी करोलबाग देल्ही आ गये| उस समय उनके पास केवल 1500 रुपये थे कोई काम धंधा था नहीं| उन्होनें कुछ पैसे जुटाकर एक तांगा-घोड़ा खरीद लिया| और इस तरह वो बन गये एक तांगा चालक|


लेकिन कुदरत को कुछ और ही मंजूर था, करीब २ महीने तक उन्होने कुतुब रोड दिल्ली पर तांगा चलाया| इसके बाद उन्हें लगा की वो ये कम नहीं कर पाएँगे| लेकिन मसाले के सिवा वो कोई दूसरा कम जानते भी नहीं थे, कुछ सोचकर उन्होने घर पे ही मसाले का काम करने लगे| बाज़ार से मसाला लाकर घर पर ही उसे कुटते थे और बाज़ार में बेचते थे| उनकी ईमानदारी और मसालों की शुद्धता की वजह से उनका कारोबार धीरे धीरे बढ़ने लगा| डिमांड ज़्यादा हुई तो मसाले घर ना पीसकर एक व्यापारी के यहाँ चक्की पर पिसवाते थे| एक दिन जब व्यापारी से मिलने गये तो उन्होने देखा कि वह मसालों में मिलावट करता था ये देखकर महाशय जी को मन ही मन बहुत दुख हुआ और उन्होने खुद की मसाला पीसने की फॅक्टरी लगाने की सोची|

किर्तिनगर में इन्होने पहली फैक्टरी लगाई और उस दिन के बाद महाशय जी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और एक के बाद एक पूरे विश्व भर में अपने कारोबार(Business) को फैलाया|आज .M.D.H. एक बड़ा ब्रांड बन चुका है और पूरे विश्व में फैला हुआ है| आज महाशय जी बहुत बड़े अरबपति उद्धयोग(Richest Business) के मलिक हैं|

महाशय जी की इस छवि से हटकर एक रूप और है वो है समाज सेवा| पूरे भारत में कई जगह उनके द्वारा संचालित विद्धयालय और अस्पताल हैं|

कहा जाता है क़ि “इंसान अपनी परिस्थितियों का नहीं अपने फ़ैसलों और कर्मों का परिणाम होता है”, ऐसा ही कुछ सीखने को मिलता है महाशय जी के जीवन से|

तो आओ मित्रों हम भी इस महान पुरुष के जीवन से प्रेरणा लेकर सफल बनने का प्रयास करते हैं

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